गया

व्यापार आरंभ मुहूर्त 2026: शुभ तिथियाँ और समय

दुकान, ऑफ़िस या नया व्यापार शुरू करने, सौदा करने या नए काम के आरंभ के लिए शुभ तिथियाँ और समय।

69 मुहूर्त · गया

जनवरी 2026

  • जनवरी19सोमवार02:14 – 06:35 (20 जनवरी)नक्षत्र: श्रवणतिथि: शुक्ल द्वितीया
  • जनवरी23शुक्रवार14:33 – 01:46 (24 जनवरी)नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपदतिथि: शुक्ल पंचमी
  • जनवरी28बुधवार09:27 – 03:17 (29 जनवरी)नक्षत्र: रोहिणीतिथि: शुक्ल दशमी, शुक्ल एकादशी

फ़रवरी 2026

  • फ़रवरी5गुरुवार00:22 – 06:29 (6 फ़रवरी)नक्षत्र: हस्ततिथि: कृष्ण पंचमी
  • फ़रवरी6शुक्रवार06:29 – 01:19 (7 फ़रवरी)नक्षत्र: हस्त, चित्रातिथि: कृष्ण पंचमी
  • फ़रवरी11बुधवार09:59 – 10:53नक्षत्र: अनुराधातिथि: कृष्ण दशमी
  • फ़रवरी19गुरुवार20:52 – 06:20 (20 फ़रवरी)नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपदतिथि: शुक्ल तृतीया
  • फ़रवरी20शुक्रवार06:20 – 14:38नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपदतिथि: शुक्ल तृतीया
  • फ़रवरी25बुधवार02:41 – 06:15 (26 फ़रवरी)नक्षत्र: मृगशिरातिथि: शुक्ल दशमी
  • फ़रवरी26गुरुवार06:15 – 12:11नक्षत्र: मृगशिरातिथि: शुक्ल दशमी

मार्च 2026

  • मार्च4बुधवार07:39 – 06:09 (5 मार्च)नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनीतिथि: कृष्ण प्रतिपदा, कृष्ण द्वितीया
  • मार्च5गुरुवार06:09 – 05:24 (6 मार्च)नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनी, हस्ततिथि: कृष्ण द्वितीया, कृष्ण तृतीया

अप्रैल 2026

  • अप्रैल15बुधवार15:23 – 22:31नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपदतिथि: कृष्ण त्रयोदशी
  • अप्रैल20सोमवार05:23 – 07:28नक्षत्र: रोहिणीतिथि: शुक्ल तृतीया
  • अप्रैल20सोमवार04:15 – 05:22 (21 अप्रैल)नक्षत्र: मृगशिरातिथि: शुक्ल पंचमी
  • अप्रैल29बुधवार05:16 – 19:52नक्षत्र: हस्ततिथि: शुक्ल त्रयोदशी

मई 2026

  • मई4सोमवार05:12 – 09:58नक्षत्र: अनुराधातिथि: कृष्ण तृतीया
  • मई8शुक्रवार01:16 – 05:09 (9 मई)नक्षत्र: श्रवणतिथि: कृष्ण सप्तमी
  • मई13बुधवार05:07 – 13:30नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपदतिथि: कृष्ण एकादशी
  • मई14गुरुवार11:21 – 05:06 (15 मई)नक्षत्र: रेवती, अश्विनीतिथि: कृष्ण त्रयोदशी
  • मई15शुक्रवार05:06 – 08:31नक्षत्र: अश्विनीतिथि: कृष्ण त्रयोदशी

जून 2026

  • जून17बुधवार13:37 – 21:39नक्षत्र: पुष्यतिथि: शुक्ल तृतीया
  • जून24बुधवार05:02 – 13:59नक्षत्र: चित्रातिथि: शुक्ल दशमी
  • जून26शुक्रवार22:22 – 05:02 (27 जून)नक्षत्र: अनुराधातिथि: शुक्ल त्रयोदशी

जुलाई 2026

  • जुलाई1बुधवार06:51 – 16:05नक्षत्र: उत्तराषाढ़ातिथि: कृष्ण प्रतिपदा, कृष्ण द्वितीया
  • जुलाई2गुरुवार16:39 – 22:32नक्षत्र: श्रवणतिथि: कृष्ण तृतीया
  • जुलाई6सोमवार01:41 – 05:06 (7 जुलाई)नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपदतिथि: कृष्ण सप्तमी
  • जुलाई9गुरुवार10:38 – 14:56नक्षत्र: अश्विनीतिथि: कृष्ण दशमी
  • जुलाई15बुधवार11:51 – 21:47नक्षत्र: पुष्यतिथि: शुक्ल द्वितीया
  • जुलाई20सोमवार05:12 – 04:03 (21 जुलाई)नक्षत्र: हस्त, चित्रातिथि: शुक्ल सप्तमी
  • जुलाई23गुरुवार01:43 – 05:14 (24 जुलाई)नक्षत्र: अनुराधातिथि: शुक्ल दशमी
  • जुलाई24शुक्रवार05:14 – 22:23नक्षत्र: अनुराधातिथि: शुक्ल दशमी, शुक्ल एकादशी
  • जुलाई29बुधवार07:15 – 05:16 (30 जुलाई)नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा, श्रवणतिथि: शुक्ल पूर्णिमा, कृष्ण प्रतिपदा
  • जुलाई30गुरुवार05:16 – 17:43नक्षत्र: श्रवणतिथि: कृष्ण प्रतिपदा

अगस्त 2026

  • अगस्त3सोमवार05:18 – 22:54नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपद, रेवतीतिथि: कृष्ण पंचमी
  • अगस्त5बुधवार09:27 – 20:42नक्षत्र: अश्विनीतिथि: कृष्ण सप्तमी
  • अगस्त7शुक्रवार18:43 – 03:21 (8 अगस्त)नक्षत्र: रोहिणीतिथि: कृष्ण दशमी
  • अगस्त14शुक्रवार03:43 – 05:24 (15 अगस्त)नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनीतिथि: शुक्ल तृतीया
  • अगस्त17सोमवार05:24 – 17:00नक्षत्र: चित्रातिथि: शुक्ल पंचमी
  • अगस्त26बुधवार05:28 – 07:59नक्षत्र: श्रवणतिथि: शुक्ल त्रयोदशी

सितंबर 2026

  • सितंबर3गुरुवार00:29 – 02:25 (4 सितंबर)नक्षत्र: रोहिणीतिथि: कृष्ण सप्तमी
  • सितंबर14सोमवार05:35 – 07:07नक्षत्र: चित्रातिथि: शुक्ल तृतीया
  • सितंबर17गुरुवार10:48 – 19:54नक्षत्र: अनुराधातिथि: शुक्ल सप्तमी
  • सितंबर21सोमवार05:38 – 05:38 (22 सितंबर)नक्षत्र: उत्तराषाढ़ातिथि: शुक्ल दशमी, शुक्ल एकादशी
  • सितंबर28सोमवार05:40 – 05:41 (29 सितंबर)नक्षत्र: रेवती, अश्विनीतिथि: कृष्ण द्वितीया, कृष्ण तृतीया

अक्टूबर 2026

  • अक्टूबर1गुरुवार06:03 – 12:35नक्षत्र: रोहिणीतिथि: कृष्ण पंचमी
  • अक्टूबर2शुक्रवार21:07 – 02:55 (3 अक्टूबर)नक्षत्र: मृगशिरातिथि: कृष्ण सप्तमी
  • अक्टूबर5सोमवार05:43 – 14:59नक्षत्र: पुष्यतिथि: कृष्ण दशमी
  • अक्टूबर8गुरुवार21:20 – 22:16नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनीतिथि: कृष्ण त्रयोदशी
  • अक्टूबर14बुधवार01:13 – 04:03 (15 अक्टूबर)नक्षत्र: अनुराधातिथि: शुक्ल पंचमी
  • अक्टूबर23शुक्रवार21:03 – 05:52 (24 अक्टूबर)नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपदतिथि: शुक्ल त्रयोदशी
  • अक्टूबर26सोमवार05:53 – 17:41नक्षत्र: अश्विनीतिथि: शुक्ल पूर्णिमा, कृष्ण प्रतिपदा
  • अक्टूबर28बुधवार13:26 – 14:37नक्षत्र: रोहिणीतिथि: कृष्ण तृतीया
  • अक्टूबर29गुरुवार22:10 – 05:55 (30 अक्टूबर)नक्षत्र: मृगशिरातिथि: कृष्ण पंचमी
  • अक्टूबर30शुक्रवार05:55 – 09:04नक्षत्र: मृगशिरातिथि: कृष्ण पंचमी

नवंबर 2026

  • नवंबर4बुधवार03:30 – 05:59 (5 नवंबर)नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनीतिथि: कृष्ण एकादशी
  • नवंबर5गुरुवार05:59 – 06:27नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनीतिथि: कृष्ण एकादशी
  • नवंबर6शुक्रवार10:31 – 06:00 (7 नवंबर)नक्षत्र: हस्त, चित्रातिथि: कृष्ण त्रयोदशी
  • नवंबर11बुधवार06:03 – 11:38नक्षत्र: अनुराधातिथि: शुक्ल द्वितीया
  • नवंबर16सोमवार06:06 – 02:17 (17 नवंबर)नक्षत्र: श्रवणतिथि: शुक्ल सप्तमी
  • नवंबर20शुक्रवार06:57 – 19:00नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपदतिथि: शुक्ल दशमी, शुक्ल एकादशी
  • नवंबर25बुधवार06:13 – 06:13 (26 नवंबर)नक्षत्र: रोहिणी, मृगशिरातिथि: कृष्ण प्रतिपदा, कृष्ण द्वितीया
  • नवंबर26गुरुवार06:13 – 17:47नक्षत्र: मृगशिरातिथि: कृष्ण द्वितीया, कृष्ण तृतीया

दिसंबर 2026

  • दिसंबर2बुधवार22:52 – 06:18 (3 दिसंबर)नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनीतिथि: कृष्ण दशमी
  • दिसंबर3गुरुवार06:18 – 10:54नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनी, हस्ततिथि: कृष्ण दशमी
  • दिसंबर3गुरुवार23:04 – 06:19 (4 दिसंबर)नक्षत्र: हस्ततिथि: कृष्ण एकादशी
  • दिसंबर4शुक्रवार06:19 – 23:45नक्षत्र: हस्त, चित्रातिथि: कृष्ण एकादशी
  • दिसंबर11शुक्रवार03:04 – 06:24 (12 दिसंबर)नक्षत्र: उत्तराषाढ़ातिथि: शुक्ल तृतीया
  • दिसंबर14सोमवार06:26 – 09:12नक्षत्र: श्रवणतिथि: शुक्ल पंचमी

समय उस अवधि को दिखाते हैं जिसमें तिथि, नक्षत्र, वार और योग सभी अनुकूल हैं। विवाह जैसे बड़े संस्कारों में इसी अवधि के भीतर लग्न देखकर अंतिम समय तय किया जाता है। रात के बाद का समय अगले दिन की सुबह (सूर्योदय से पहले) का है।

ये मुहूर्त कैसे चुने गए

शुभ नक्षत्र
अश्विनी, रोहिणी, मृगशिरा, पुष्य, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, अनुराधा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, उत्तरा भाद्रपद, रेवती
शुभ वार
सोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार
शुभ तिथियाँ
शुक्ल: द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, त्रयोदशी, पूर्णिमा
कृष्ण: प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, त्रयोदशी
टाले गए योग
व्यतीपात, वैधृति
इन समयों को छोड़ा गया है
खरमास (सूर्य धनु या मीन में), अधिक मास, भद्रा (विष्टि करण)

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